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इश्क़ नहीं है

 खुल कर हँसना,छुप कर रोना,पक्की बात है इश्क़ नहीं है. राते जगना, और तारे गिनना, पक्की बात है इश्क़ नहीं है. इश्क नहीं है, इश्क नहीं है, तेरा मुझसे इश्क नहीं है.  पर तू मेरी है, मैं तेरा हूँ, पक्की बात है इश्क नहीं है.  चुप रहना,छुप कर रहना,मिल कर भी ना मुझसे मिलना.  पर छत पर रहना,राहे तकना,पक्की बात है इश्क नहीं है.  यूं तेरा तारीफें करना, हलचल दिल में करता है.  कहता है, कहता भी नहीं, पक्की बात है इश्क नहीं है. 

भूली नहीं होगी.

मेरा दावा हैं की वो मुझे भूली नहीं होगी. इतनी मोहब्बत किसी से मिली नही होगी।  मेरे संग थी , कली थी, मुस्कुराती थी ,  पता हैं अब फूल हैं मगर खिली नहीं होगी। उदास चेहरा , वीरान आँखे , झुकी पलकें  झूम कर  उसकी बाहों में, झूली नहीं होगी।  दिल मे जो जज्बात है , इजहार कर दे।  यकीन कर मेरा , तुझे सूली नहीं  होगी। 

प्यार करेंगे टूटकर

देखो हम प्यार करेंगे तुमसे टूटकर। तुम जा नहीं पाओगे हमसे छूटकर। धड़कनो को आराम मिले गले लग जाओ , जाना नहीं कभी जानां हमसे रूठकर। गजब बाजीगरी थी कातिल की नजर मे, नजर नजर में ले गया सब कुछ मुझसे लूटकर। मुझे मंजूर हैं हर तभाही इश्क़ में तेरे , जुदा न होना कि रोये न दिल मेरा टूटकर।

इश्क़ का चर्चा

लजा जाता हैं जब सुनता हैं, कही वो  इश्क़ का चर्चा। दिलों  की महफ़िल में  शुरू फिर, पुराने  इश्क़ का चर्चा। कोई  अगर पूछ ले उससे, क्या हैं एहसास मोहब्बत का। गुड़ गूंगे का लो मजा बस, क्यों लफ्जो का बेकार का खर्चा।  मिलना था ,ना मिल पाए, अब गैरो की अमानत  वो।  मगर रखता है मेरे दिल मे, खुदा से पहले  वो दर्जा।    गलत  है गर  नाम लेकर मैं, करू रुसवां चाहत को।  गुपचुप इश्क़ करने में,  बताये क्या भला हर्जा। 

नहीं आया

वो चला गया तो  लौट  के  वापस नहीं आया। मेरे साथ रहा था जो कभी बनके साया। जिन्हे  एहसास कराया उल्फत का हमने , वो कहते हैं की हमे ढंग से जताना नहीं आया। साँसों से, आँखों से , इशारो से बयाँ  की,  जालिम को ना जाने क्यूँ  समझ  नहीं आया। इश्क़ तो ऐसा था कि एक मिसाल बनता , पर ना मुझे मिला ना उसी के काम आया। उतरते कैसे हैं दिल मे मालूम था मुझे, पर दिल से किसी को जुदा ना करना आया। 

बहुत...

मत पूछ मुझको हुआ क्यों मिलके दर्द बहुत.  जख्म खुले थे ,और वो था नमकीन बहुत. मैंने देदी जब उसने मांगी इजाज़त - ए - रुख्सती मुझसे  जिस अदा से मांगी  थी , वो थी  बेहतरीन बहुत . किसी ने उससे पूछ ली , मुझसे  जुदा होने की वजह  कमबख्त ने बोल दिया मुझको मिजाज - ए - रंगीन बहुत अब सजा होगी तो सजा- ए - मौत से कम क्या होगी इल्जाम लगा दिया  है जालिम ने संगीन बहुत 

तड़फते होंठ मेरे...

तड़फते होंठ मेरे और तरसती प्यास तेरी  क्या इतना काफी नहीं इश्क़ होने के लिए