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नवंबर 26, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बहुत...

मत पूछ मुझको हुआ क्यों मिलके दर्द बहुत.  जख्म खुले थे ,और वो था नमकीन बहुत. मैंने देदी जब उसने मांगी इजाज़त - ए - रुख्सती मुझसे  जिस अदा से मांगी  थी , वो थी  बेहतरीन बहुत . किसी ने उससे पूछ ली , मुझसे  जुदा होने की वजह  कमबख्त ने बोल दिया मुझको मिजाज - ए - रंगीन बहुत अब सजा होगी तो सजा- ए - मौत से कम क्या होगी इल्जाम लगा दिया  है जालिम ने संगीन बहुत 

तड़फते होंठ मेरे...

तड़फते होंठ मेरे और तरसती प्यास तेरी  क्या इतना काफी नहीं इश्क़ होने के लिए