बेशर्म कौम .....


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सभी  मुर्दे  है किसी  को  भी  सांस  नही  आती ,                                       
अगर जिन्दा हैं तो फिर क्यों आवाज़ नही आती.
 एक तरफ अन्ना, जो लड़ता हैं हमारी खातिर ,
 एक  तरफ सरकार  हैं जो  बाज़  नही  आती.
 बड़ी महान हैं मेरे इस देश की जनता ,
 कोई कितना भी लूटे पर ,इनको खाज  नही आती.
शहीदों ने दे क़ुरबानी ,पाई थी आजादी .
मगर इस देश की जनता को लाज नही आती . 


                                                    

टिप्पणियाँ

  1. क्रांति की भबक पड़ी है चिंगारी ..जाग्रति की आग जलाने को ...रोक सके तो रोक ले दुनिया ...इन मतवाले परवानो को ...उठ रही है आंधी दिलों में .साफ अवनी, होगा निर्मल आकाश ...काबिल नहीं है मेरी कल्पना उस मंजर को समझाने को !!
    सर बहुत ही प्रेरक और क्रन्तिकारी रचना है !!

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