..........................बहुत हैं

जानते हैं कि आप खूबसुरत बहुत हैं .
लेकिन आपसे भी खूबसुरत बहुत हैं .

मुश्किलो से मिलता है इंसान कोई .
हाँ इंसानों की शक्ल में हैवान बहुत हैं .

क्या जरूरत है तलवार उठाने की ?
कत्ल के लिए दो अलफ़ाज़ बहुत हैं .

फ़िज़ूल वक़्त गुजारना क्यूँ नमाज में ?
किसी रोते हुए बच्चे को हँसाना  बहुत है .

 ज्यादा की हवस नही रखिये दिमाग में .
आदमी को झोपड़े का आशियाँ बहुत है .

कुत्तो से सीख लीजिये वफा की अदा ,
इन आदमियों से कुत्ते बेहतर बहुत है .

मैं नही मांगता घर में चाँद की चांदनी  ,
मुझे तो एक "दीपक" की रौशनी बहुत है

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