नजरों से पोशीदा

तू दिल के रूबरू हैं ,फिर भी नजरों से पोशीदा क्यूँ ?
आती हैं जब यादें तेरी ,दर्द बढ़ता हैं ज्यादा क्यूँ ?
भूले से भी कर दे कोई, इश्क का गर जिकर.
आँखों से अश्को की हो जाती हैं इब्तदा क्यूँ?

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