हकीकत...

सभी हमदर्द है मेरे ,हर कोई दोस्त बनता है .
हाले दिल मगर मेरा कहां कोई समझता  है.
मुझे दो बात समझाकर,हो जाते है सब फारिग .
मगर तन्हाई में तन्हा मेरा ही दिल सिसकता हैं .

                                                    poet.tyagi.poem@gmail.com

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