रिश्ता तुमसे............
मैं जानता हूँ जो वो छुपाती है हाथ में .
शादी की मेहंदी उसने लगाई है हाथ में .
अरे कब से रचने लगी है इतना गहरा मेहँदी ,
मेरे दिल का खून तूने लगाया है हाथ में .
वो मुझसे पूछती है मेरा रिश्ता क्या है तुझसे ,
अरे मेरी किस्मत की लकीरे है तेरे हाथ में.
वो कहती हैं वो किसी और की है ,
अरे कभी चेहरा तो देख आइना लेके हाथ में .
बयाँ कर नही सकता ओर मैं मुहब्बत अपनी ,
बस दिल निकाल के रख दूंगा तेरे हाथ में.
शादी की मेहंदी उसने लगाई है हाथ में .
अरे कब से रचने लगी है इतना गहरा मेहँदी ,
मेरे दिल का खून तूने लगाया है हाथ में .
वो मुझसे पूछती है मेरा रिश्ता क्या है तुझसे ,
अरे मेरी किस्मत की लकीरे है तेरे हाथ में.
वो कहती हैं वो किसी और की है ,
अरे कभी चेहरा तो देख आइना लेके हाथ में .
बयाँ कर नही सकता ओर मैं मुहब्बत अपनी ,
बस दिल निकाल के रख दूंगा तेरे हाथ में.
good poems deepak.... keep up the good work.. :)
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