खुल कर हँसना,छुप कर रोना,पक्की बात है इश्क़ नहीं है. राते जगना, और तारे गिनना, पक्की बात है इश्क़ नहीं है. इश्क नहीं है, इश्क नहीं है, तेरा मुझसे इश्क नहीं है. पर तू मेरी है, मैं तेरा हूँ, पक्की बात है इश्क नहीं है. चुप रहना,छुप कर रहना,मिल कर भी ना मुझसे मिलना. पर छत पर रहना,राहे तकना,पक्की बात है इश्क नहीं है. यूं तेरा तारीफें करना, हलचल दिल में करता है. कहता है, कहता भी नहीं, पक्की बात है इश्क नहीं है.
तू दिल के रूबरू हैं ,फिर भी नजरों से पोशीदा क्यूँ ? आती हैं जब यादें तेरी ,दर्द बढ़ता हैं ज्यादा क्यूँ ? भूले से भी कर दे कोई, इश्क का गर जिकर. आँखों से अश्को की हो जाती हैं इब्तदा क्यूँ?
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