खुल कर हँसना,छुप कर रोना,पक्की बात है इश्क़ नहीं है. राते जगना, और तारे गिनना, पक्की बात है इश्क़ नहीं है. इश्क नहीं है, इश्क नहीं है, तेरा मुझसे इश्क नहीं है. पर तू मेरी है, मैं तेरा हूँ, पक्की बात है इश्क नहीं है. चुप रहना,छुप कर रहना,मिल कर भी ना मुझसे मिलना. पर छत पर रहना,राहे तकना,पक्की बात है इश्क नहीं है. यूं तेरा तारीफें करना, हलचल दिल में करता है. कहता है, कहता भी नहीं, पक्की बात है इश्क नहीं है.
जब भी कोई धडकन धडकती हैं .
जन्म लेती हैं जब बेटिया ,
क्यू माँ की भी आँखे टपकती हैं?
तंग हो गये हैं औलादों के दिल,
गद्दारों को मिल रहे इनाम
बहादुरी कही डर कर दुबकती हैं
बेईमानो की कट रही हैं चाँदी
ईमानदारी कही कोने में सुबकती हैं
झूठ को इस कद्र मिली शोहरत
कि सच्चाई वीरानो में भटकती हैं
खुदकुशी बन गयी खुशी लोगो की.
जिन्दगी जीने को सर पटकती हैं
महंगाई की मार हैं मजदूरों पर
औलाद सूखी रोटियों को तरसती हैं.