हौसला ..................

तेज थी हवा बहुत, था दीये मे तेल कम बहुत .
हौसला दीपक का देख,वो देर तक जला बहुत .
वादे पर तेरे यकीन ,मैं इंतजार करता रहा ,
बह चुका गंगा मे तब से,अब तलक पानी बहुत.
लाख चाहा रोकना मगर अश्क आँख से मेरे
छलक ही पड़े ये जो, था सीने मे दर्द बहुत .
धडकने खामोश और ख्वाबो के तेरे सिलसिले
तन्हा दिल जब भी हुआ,आई तेरी याद बहुत.
जमजमे दजला-फरात से,अश्क कमतर नही
बेबस कोई भी दिल हुआ तो,रोता है खुदा बहुत.
लफ्ज खुद आते रहे मैं बगल रहा खड़ा
इनायत एक ओर गजल खुदा शुक्रिया बहुत

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अंदाज़ नजर के.....................

इश्क़ नहीं है

हम मिल जाते अगर