हमने देखा हैं ...........

सुबह का सूरज हमने ढलते देखा हैं .
सर्द रात में बर्फ पिघलते देखा है .
अपनी आस्तीनों को देखते रहना .                                
बगलों से सांप निकलते देखा हैं .
पाक दामन का दावा वो कर नही सकता.
कल शब उसे दाग धुलते देखा हैं .
अश्को का कोई एहतराम नही मुझको.
गम और ख़ुशी में भी निकलते देखा हैं.
देखा हैं आँखों से सच का लंगडापन .
अफवाहों को मस्ती में चलते देखा हैं.

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