कुछ उलझा -२ सा मन हैं .....
कुछ उलझा -२ सा मन हैं .....
कुछ बहका -२ सा मन हैं...
फूलो में देखा हैं प्यारापन ,
काँटों में भी तो हैं अपनापन .
दोनों को चुनने का मन हैं ......
कुछ उलझा -२ सा मन हैं .....
तेरी यादो से प्यार बहुत हैं ,
लेकिन और भी तो काम बहुत हैं ,
बहुत जरूरी जीवनयापन हैं .....
कुछ उलझा -२ सा मन हैं .....
रात -२ भर चाँद रुलाया .
तुमको दिल ये भूल न पाया .
इश्क का कैसा भोलापन हैं....
कुछ उलझा -२ सा मन हैं .....
कुछ बहका -२ सा मन हैं...
फूलो में देखा हैं प्यारापन ,
काँटों में भी तो हैं अपनापन .
दोनों को चुनने का मन हैं ......
कुछ उलझा -२ सा मन हैं .....
तेरी यादो से प्यार बहुत हैं ,
लेकिन और भी तो काम बहुत हैं ,
बहुत जरूरी जीवनयापन हैं .....
कुछ उलझा -२ सा मन हैं .....
रात -२ भर चाँद रुलाया .
तुमको दिल ये भूल न पाया .
इश्क का कैसा भोलापन हैं....
कुछ उलझा -२ सा मन हैं .....

so nice ...kuch uljha uljha sa man hai ....bahut hi pyari....lagta hai samndar ke kubsurat motion se sajaya hai ise..!!
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