वो बिछड़ता चला गया..........................
वो उतरा मेरी रूह मे ,और उतरता चला गया ,
मैं खुद ही मे दोस्तों , बिखरता चला गया .
इस पहाड़ सी जिन्दगी मे ,वो लम्हा बस अपना ,
उसके आगोश मे जब ,मैं पिघलता चला गया .
हर साँस मे वो थी ,हर धडकन मे वो थी ,
लाख रोका उसे पर वो बिछड़ता चला गया .
सब रस्मे ,सब कसमे ,निभाई इश्क मे मैंने ,
पर अकड मे वो अपनी ,झगड़ता चला गया .
और क्या ?जिन्दगी के आखिरी लम्हे में दिल "दीपक" ,
लेकर उसी का नाम दुनिया से धडकता चला गया .
मैं खुद ही मे दोस्तों , बिखरता चला गया .
इस पहाड़ सी जिन्दगी मे ,वो लम्हा बस अपना ,
उसके आगोश मे जब ,मैं पिघलता चला गया .
हर साँस मे वो थी ,हर धडकन मे वो थी ,
लाख रोका उसे पर वो बिछड़ता चला गया .
सब रस्मे ,सब कसमे ,निभाई इश्क मे मैंने ,
पर अकड मे वो अपनी ,झगड़ता चला गया .
और क्या ?जिन्दगी के आखिरी लम्हे में दिल "दीपक" ,
लेकर उसी का नाम दुनिया से धडकता चला गया .

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