वफा..............

इस वस्ले ए शाम की कभी सुबह ना हो .
तू मुझसे ऐसे मिल कि कभी जुदा ना हो.

जीस्त भी लुटा देते है चाहत में लोग जो ,
चाहत की साथ उनके कभी दगा ना हो .

ओर तो कुछ नही बस इतना चाहते हैं ,
दामन से तेरे खुशिया कभी खफा ना हो .

तूने वफा न की हमसे तो क्या हुआ ?
पर चाहती है जिसे तू वो बेवफा ना हो .

जब भी जले घर में तेरे चाहत के "दीपक" ,
हम दुआ करेंगे कि दूर-२ तक हवा ना हो .

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