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इश्क़ नहीं है
लेखक:
Deepak Tyagi
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खुल कर हँसना,छुप कर रोना,पक्की बात है इश्क़ नहीं है. राते जगना, और तारे गिनना, पक्की बात है इश्क़ नहीं है. इश्क नहीं है, इश्क नहीं है, तेरा मुझसे इश्क नहीं है. पर तू मेरी है, मैं तेरा हूँ, पक्की बात है इश्क नहीं है. चुप रहना,छुप कर रहना,मिल कर भी ना मुझसे मिलना. पर छत पर रहना,राहे तकना,पक्की बात है इश्क नहीं है. यूं तेरा तारीफें करना, हलचल दिल में करता है. कहता है, कहता भी नहीं, पक्की बात है इश्क नहीं है.
हम मिल जाते अगर
लेखक:
Deepak Tyagi
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ख्यालो ख्यालो मे एक ख्याल आया , हम मिल जाते अगर। जमीं से फलक सब कुछ था अपना, हम मिल जाते अगर। ना चैन मिलता लबो को हमारे ना फिर तरसता यूं दिल , इंतहा से मोहब्बत की जाते गुजर , हम मिल जाते अगर। तुम्हे वादियों मे दिल की घुमाता, पलको पे रखता बिठाकर , साँसों से तेरी मै आता जाता , हम मिल जाते अगर। बाँहों मे तुझको रखता समेटे ,बिखरने ना देता कभी, खवाबो को तेरे चुन चुन सजाता हम मिल जाते अगर।

kya baat h tyagi g awesome man
जवाब देंहटाएंnyc lines ..!!
जवाब देंहटाएंThanks Reet.
जवाब देंहटाएंWaiting for ur joining this blog